शांति से जश्न मनाने की अपील, नहीं तो होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक सफलता के अगले ही दिन प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन से स्पष्ट अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि चुनावी नतीजों के बाद होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा से कड़ाई से निपटा जाना चाहिए और इसमें शामिल अराजक तत्वों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई होनी चाहिए। भट्टाचार्य ने अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि भाजपा का कोई भी सदस्य हिंसा या किसी भी प्रकार के गैर-कानूनी कृत्य में संलिप्त पाया गया, तो उसे तत्काल प्रभाव से पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
चुनावी हिंसा पर जीरो टॉलरेंस और सख्त अनुशासनात्मक चेतावनी
पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में जीत का जश्न शांतिपूर्ण होना चाहिए और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद होने वाली किसी भी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पार्टी ऐसे कृत्यों की कड़ी निंदा करती है। भाजपा अध्यक्ष ने यह भी साफ किया कि संगठन के भीतर अनुशासन सर्वोपरि है और यदि कोई कार्यकर्ता विजय के उत्साह में मर्यादा लांघता है, तो पार्टी उसे निष्कासित करने में जरा भी संकोच नहीं करेगी।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक
कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भाजपा नेता ने मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला से संपर्क साधा है और उनसे आग्रह किया है कि जहां भी उपद्रव की खबरें आएं, वहां प्रशासन बिना किसी देरी के त्वरित हस्तक्षेप करे। इसी सिलसिले में बिधाननगर स्थित भाजपा कार्यालय में एक उच्च स्तरीय विचार-विमर्श हुआ, जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षकों और राज्य के वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य परिणामों के उपरांत राज्य में शांति बहाली सुनिश्चित करना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना था ताकि प्रदेश में सुरक्षा का माहौल बना रहे।
संयमित विजय उत्सव और मतदाताओं के प्रति आभार संदेश
समिक भट्टाचार्य ने राज्य की जनता द्वारा दिए गए प्रचंड जनादेश के लिए मतदाताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया और विशेष रूप से उन प्रवासी श्रमिकों की सराहना की जो तमाम बाधाओं के बावजूद लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा लेने वापस लौटे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि जीत का उत्सव किसी दूसरे की भावनाओं को आहत करने वाला नहीं होना चाहिए और न ही इससे किसी को शारीरिक या मानसिक चोट पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हुए शांतिपूर्ण ढंग से खुशी मनाने और समाज में सद्भाव बनाए रखने का निर्देश दिया है।

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