ममता की पार्टी में सब ठीक नहीं? हार के बाद पार्षदों ने छोड़ा पद
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों करारी हार मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरूनी हालात ठीक नहीं चल रहे हैं। पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के संकेत उस समय साफ देखने को मिले, जब चुनाव के बाद आयोजित किए गए टीएमसी के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में विधायकों की संख्या बेहद कम रही। इसके साथ ही, टीएमसी के नियंत्रण वाली दो नगरपालिकाओं में पार्षदों द्वारा किए गए सामूहिक इस्तीफों ने पार्टी के भीतर एक बड़ी बगावत और राजनीतिक संकट की अटकलों को हवा दे दी है।
विरोध प्रदर्शन से गायब रहे आधे से ज्यादा टीएमसी विधायक
विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के सामने आयोजित किए गए धरना प्रदर्शन में टीएमसी के 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही शामिल हुए। यह प्रदर्शन राज्य की नई सरकार द्वारा की जा रही बुलडोजर कार्रवाई, चुनाव बाद हुई हिंसा और फुटपाथ दुकानदारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के विरोध में था। इतनी बड़ी संख्या में विधायकों का न पहुंचना टीएमसी के लिए तब और चिंताजनक हो जाता है, जब वह राज्य में अपनी खोई हुई जमीनी पकड़ को दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले 19 मई को कालीघाट में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की अध्यक्षता में हुई बैठक से भी करीब 15 विधायक गायब रहे थे, जहां मौजूद कुछ विधायकों ने बंद कमरों की बैठकों को छोड़कर जनता के बीच जाने की वकालत की थी।
जहांगीर खान के मामले पर अभिषेक बनर्जी पर उठे सवाल
कालीघाट की बैठक में कोलकाता के दो और हावड़ा के एक विधायक ने एक ही गाड़ी में आकर अपनी एकजुटता दिखाई और पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर सीधे सवाल खड़े किए। इन विधायकों ने फलता सीट से दिग्गज नेता जहांगीर खान के मतदान से ठीक दो दिन पहले चुनाव मैदान से हटने के फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने पूछा कि इतने बड़े कदम के बाद भी जहांगीर खान के खिलाफ अब तक कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? चूंकि फलता विधानसभा क्षेत्र टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के तहत आता है, इसलिए इन बयानों को सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी पर एक राजनैतिक तंज के रूप में देखा जा रहा है।
कांचरापाड़ा और हलीशहर नगरपालिकाओं में पार्षदों की बड़ी बगावत
पार्टी को सबसे बड़ा झटका उत्तर 24 परगना जिले की कांचरापाड़ा और हलीशहर नगरपालिकाओं में लगा है, जहां पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपने पद छोड़ दिए हैं। कांचरापाड़ा नगरपालिका में कुल 24 में से 15 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है। टीएमसी सूत्रों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही स्थानीय नेतृत्व के काम करने के तरीके और नागरिक सुविधाओं को लेकर पार्षदों के भीतर भारी असंतोष पनप रहा था, जो अब इस बड़े इस्तीफे के रूप में सबके सामने आया है।
भाजपा विधायक ने जारी की इस्तीफा देने वाले पार्षदों की लिस्ट
हलीशहर नगरपालिका में भी बगावत की यही तस्वीर देखने को मिली, जहां 23 में से 16 पार्षदों ने पार्षद राजू साहनी के नेतृत्व में एक आपात बैठक की और डिप्टी चेयरमैन की मौजूदगी में अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने वालों में पांच महिला पार्षद भी शामिल हैं, हालांकि नगरपालिका के चेयरमैन शुभंकर घोष ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। इस बगावत के तुरंत बाद बिजपुर से बीजेपी विधायक सुदीप्त दास ने इस्तीफा देने वाले सभी 16 पार्षदों की सूची जारी की। उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि इस राजनैतिक बदलाव से नगर की सरकारी सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी। इन सामूहिक इस्तीफों के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम हो गई है कि ये बागी पार्षद बहुत जल्द बीजेपी का दामन थाम सकते हैं, जबकि टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम पर फिलहाल पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।

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