यहाँ आपकी खबर को नए और विस्तृत शब्दों में, किसी भी चैनल या लेखक का नाम हटाकर, बिना किसी पॉइंट (bullet points) के और 4 मुख्य सब-हेडिंग्स (Bold) के साथ तैयार किया गया है:

धार में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर का राजनीतिक वीडियो वायरल, नौकरी से बर्खास्तगी के लिए भोपाल भेजा गया पत्र

धार:मध्य प्रदेश के धार जिले में एक कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) का सोशल मीडिया पर प्रसारित राजनीतिक और आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ महिला अधिकारी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और सोनम वांगचुक के समर्थन में एक वीडियो जारी किया था, जिसमें केंद्र सरकार और सत्ताधारी दल की नीतियों की तीखी आलोचना की गई थी। इस मामले को सिविल सेवा आचरण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित कर्मचारी को सेवा से पृथक करने की विभागीय प्रक्रिया शुरू कर दी है।

शासकीय कार्यालय के भीतर से वीडियो बनाकर की गई राजनीतिक टिप्पणी

धार जिले के बाग ब्लॉक अंतर्गत काकड़वा गांव स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ सीएचओ किरण भाटिया ने स्वास्थ्य केंद्र के भीतर बैठकर यह विवादास्पद वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो के शुरुआती हिस्से में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के घटनाक्रम का फुटेज जोड़ते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए थे। एक शासकीय सेवक द्वारा अपने कार्यस्थल का उपयोग राजनीतिक बयानों और टिप्पणियों के लिए किए जाने से मामला और अधिक तूल पकड़ गया, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

आम जनता को संबोधित करते हुए अंधभक्त न बनने और वैचारिक बदलाव की अपील

प्रसारित वीडियो में महिला स्वास्थ्य अधिकारी ने आम जनता को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों को राजनीतिक अंधभक्ति से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वे किसी विशेष राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं कर रही हैं, बल्कि जो जनहित में बेहतर है उसके साथ खड़ी हैं। इसके साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन करने की बात कही और धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि लोगों को राजनीतिक नेताओं के बजाय अपने ईष्ट देवों की भक्ति करनी चाहिए ताकि जीवन का कल्याण हो सके।

सत्तारूढ़ दल के नेताओं की शिकायत के बाद हटाई गई विवादित पोस्ट

इस वीडियो के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों ने कड़ा एतराज जताया। बीजेपी नेताओं ने इसे सरकारी कर्मचारी के आचरण नियमों का घोर उल्लंघन करार देते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), इंदौर संभाग के संयुक्त संचालक और जिला प्रशासन को लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में अधिकारी को तत्काल पद से हटाने की मांग की गई थी। विवाद बढ़ता देख और प्रशासनिक कार्रवाई की आशंका को देखते हुए किरण भाटिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से उस वीडियो को हटा दिया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा सरकार की छवि धूमिल करने का नहीं था।

सीएमएचओ ने लिया कड़ा संज्ञान, सेवा से बर्खास्तगी हेतु एनएचएम संचालक को भेजा प्रस्ताव

विवाद के तूल पकड़ने के बाद धार जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. अनीता सिंगारे ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने जांच उपरांत पाया कि सरकारी पद पर रहते हुए इस प्रकार की बयानबाजी नियम विरुद्ध है। सीएमएचओ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के प्रदेश संचालक को पत्र लिखकर सीएचओ किरण भाटिया को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त (पृथक) करने की सिफारिश की है। फिलहाल इस मामले में राज्य स्तर से अंतिम आदेश जारी होना बाकी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।