मुरैना:शहर के विकासखंड स्थित चंबल कॉलोनी के प्राथमिक-माध्यमिक विद्यालय में एक मासूम छात्र के घायल होने और उसके बाद परिजनों के साथ दुर्व्यवहार का मामला लगातार गर्माता जा रहा है। स्कूल स्टाफ की लापरवाही के कारण छात्र की उंगली में गंभीर चोट लग गई थी। जब पीड़ित पिता शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, तो आरोप है कि प्रधानाध्यापिका ने उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ जमकर अभद्रता की और बच्चों का स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (TC) काटकर स्कूल से बाहर निकालने की धमकी तक दे डाली।

दरवाजे से नीचे उतरते समय हुआ हादसा, बहता रहा खून

वनखंडी रोड स्थित वीडियो वाली गली के निवासी मनोज राठौर के तीन बच्चे—विकास (कक्षा 1), दिलीप (कक्षा 3) और मानसी (कक्षा 8) इसी शासकीय विद्यालय में पढ़ते हैं। पीड़ित पिता के अनुसार 13 जुलाई को स्कूल परिसर के दरवाजे से उतरते समय स्टाफ की सरासर लापरवाही के चलते उनके बेटे की उंगली में अत्यधिक गंभीर चोट आ गई। उंगली से भारी मात्रा में खून बहने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने समय पर उचित देखभाल नहीं की, जिससे बच्चे को काफी पीड़ा उठानी पड़ी।

प्रधानाध्यापिका पर अभद्र व्यवहार और टीसी काटने की धमकी का गंभीर आरोप

जब मनोज राठौर इस पूरी घटना का उलाहना लेकर स्कूल की प्रधानाध्यापिका नीरू शर्मा के पास पहुंचे, तो उन्होंने समस्या का समाधान करने के बजाय उल्टा पीड़ित पिता को ही खरी-खोटी सुनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि प्रधानाध्यापिका ने अहंकार दिखाते हुए कहा कि उनकी नौकरी किसी के रहमोकरम पर नहीं बल्कि खुद के दम पर है और जो करना हो कर लो। इसके साथ ही उन्होंने शिकायत करने पर बच्चों की टीसी काटकर उन्हें विद्यालय से निष्कासित करने की सीधी धमकी भी दे दी।

पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव का भी खुलासा

पीड़ित पिता ने केवल हादसे की शिकायत ही नहीं की, बल्कि स्कूल में व्याप्त कुप्रबंधन को भी उजागर किया। उनका आरोप है कि इस विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पीने के साफ पानी और उपयोग योग्य शौचालय जैसी अति-आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। जब इन जनहित से जुड़ी कमियों की ओर प्रधानाध्यापिका का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया गया, तो उन्हें सहयोग के बजाय केवल डांट-फटकार और धमकियां ही हासिल हुईं।

कलेक्टर से की गई लिखित शिकायत, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने से हड़कंप

प्रशासनिक स्तर पर न्याय की उम्मीद में पीड़ित पिता ने जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन सौंपकर संबंधित प्रधानाध्यापिका और लापरवाह कर्मचारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गुहार लगाई है। हालांकि आवेदन देने के बाद भी फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर कोई आधिकारिक बयान या ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, इस पूरे मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।