अमेरिका की नई रणनीति! ईरान के बाद यूक्रेन की ड्रोन क्षमता पर बढ़ा भरोसा
वाशिंगटन: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वैश्विक रक्षा और सामरिक परिदृश्य में एक बड़ा और नाटकीय बदलाव देखने को मिल रहा है। जो अमेरिका कल तक यूक्रेन को अरबों डॉलर के हथियार, मिसाइलें और टैंक भेजकर उसकी मदद कर रहा था, अब वही अमेरिका यूक्रेन की 'बैटल-टेस्टेड' ड्रोन तकनीक हासिल करने में जुटा है। पेंटागन की सिफारिश पर अमेरिकी कंपनी 'रेकनक्राफ्ट' यूक्रेन के मशहूर 'मागुरा V5' (Magura V5) ड्रोन बोट्स का लाइसेंस के तहत उत्पादन शुरू करने जा रही है।
रूस के जहाजों को डुबोने वाली तकनीक पर अमेरिका का दांव
ओरेगन स्थित रेकनक्राफ्ट कंपनी अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के लिए नावें बनाती है। अब यह कंपनी यूक्रेन के परीक्षण-सिद्ध मागुरा ड्रोन बोट्स का निर्माण करेगी। काला सागर में रूसी युद्धपोतों और समुद्री संपत्तियों को तबाह करने में मागुरा ड्रोन बोट्स की भूमिका मील का पत्थर साबित हुई है। जीपीएस, इनर्शियल नेविगेशन, नाइट विजन, ऑटोपायलट और भारी विस्फोटक ले जाने की क्षमता के साथ ये कम लागत वाले ड्रोन बोट्स दुश्मन के लिए बेहद घातक साबित हुए हैं। पेंटागन अब इसे अपने इंडस्ट्रियल बेस में शामिल कर भविष्य के समुद्री युद्धों की तैयारी तेज कर रहा है।
मागुरा ड्रोन बोट की प्रमुख खासियतें
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लंबी दूरी और तेज रफ्तार: यह करीब 800 किलोमीटर की दूरी तक संचालित हो सकती है और 78 किमी/घंटे की अधिकतम गति पकड़ सकती है।
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घातक पेलोड क्षमता: यह बोट लगभग 200 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम है, जो किसी भी बड़े युद्धपोत को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
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बहुउद्देशीय उपयोग: यह हमले के साथ-साथ निगरानी, टोही, गश्त, माइन-रोधी अभियानों और खोज एवं बचाव कार्यों में भी बेहद कारगर है।
महंगे हथियारों की जगह लो-कॉस्ट अनमैन्ड सिस्टम पर फोकस
अमेरिका को इस बात का अहसास हो चुका है कि इंडो-पैसिफिक, मध्य पूर्व या रूस-चीन-ईरान जैसे बहु-मोर्चा खतरों से निपटने के लिए बेहद महंगे हथियारों के बजाय 'लो-कॉस्ट, हाई-इम्पैक्ट' ड्रोन सिस्टम ही भविष्य के युद्ध की कुंजी हैं। ईरान जैसे देशों से मुकाबला करने में अमेरिका ने खरबों रुपये के महंगे मिसाइल और सुरक्षा तंत्र इस्तेमाल किए हैं, जबकि दुश्मन सस्ते ड्रोन तकनीक से चुनौती दे रहा है। ऐसे में अमेरिका-यूक्रेन की यह डील 21वीं सदी के युद्ध कला में 'टेक्नोलॉजी के रिवर्स फ्लो' का जीता-जागता उदाहरण है, जहाँ स्वदेशी और किफायती ड्रोन पारंपरिक युद्धपोतों पर भारी पड़ रहे हैं।

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