इटावाउत्तर प्रदेश के इटावा जिले स्थित इटावा पब्लिक स्कूल की तीसरी मंजिल की खिड़की से छलांग लगाकर आठवीं कक्षा के छात्र पिंटू द्वारा आत्महत्या किए जाने की इस हृदयविदारक घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे और आंसुओं में डुबो दिया है। अपने इकलौते और लाडले बेटे को इस तरह अचानक खोने के बाद माता-पिता का रो-रोकर बेहद बुरा हाल है। दुखी पिता का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से उनके बेटे के व्यवहार में अजीब से बदलाव देखने को मिल रहे थे और वह अपनी पढ़ाई के भारी दबाव तथा तनाव के दौर से गुजर रहा था।

दूसरी ओर, पीड़ित परिवार ने स्कूल प्रबंधन पर यह बेहद गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने समय रहते इस बड़ी घटना की वास्तविक सूचना परिजनों को नहीं दी और स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती। शहर के मुखिया अड्डा न्यू कॉलोनी के रहने वाले पिता राजेश राठौर ने बताया कि मृतक पिंटू उनकी तीन बेटियों के बीच इकलौता बेटा था। बीते बुधवार की सुबह वह रोजाना की तरह अपनी तीनों बहनों—सोनी, मोनिका और नेहा के साथ हंसते-खेलते स्कूल पढ़ने गया था, क्योंकि उसकी बहनें भी उसी विद्यालय में अध्ययनरत हैं।

छुट्टी के बाद नहीं लौटा बेटा, अस्पताल पहुंचने पर चला मौत का पता

घटना के संबंध में परिजनों ने बताया कि बुधवार की दोपहर करीब साढ़े 12 बजे स्कूल की छुट्टी होने के बाद पिंटू की तीनों बहनें तो सकुशल घर वापस लौट आईं, लेकिन पिंटू उनके साथ घर नहीं पहुंचा। शुरुआत में परिवारवालों को यही लगा कि शायद वह किसी काम से रुक गया होगा या दोस्तों के साथ होगा, लेकिन कुछ ही देर बाद स्कूल प्रबंधन की ओर से फोन आया कि उनके बेटे का एक्सीडेंट (दुर्घटना) हो गया है और वे तुरंत जिला अस्पताल पहुंच जाएं। जैसे ही बदहवास परिजन जिला अस्पताल पहुंचे, उन्हें कड़वी सच्चाई का पता चला कि उनका इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।

पिता बोले—"पढ़ाई को लेकर मानसिक तनाव में था बेटा, सुबह ही हुई थी बातचीत"

शोक में डूबे पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने उन्हें फोन पर यह बिल्कुल नहीं बताया कि पिंटू ने विद्यालय की तीसरी मंजिल से नीचे छलांग लगाई है। उनका घर स्कूल से बमुश्किल 300 मीटर की दूरी पर स्थित है, इसके बावजूद उन्हें समय पर सूचना नहीं दी गई। पिता ने यह भी साझा किया कि पिंटू पिछले कुछ दिनों से अपनी पढ़ाई को लेकर भारी मानसिक दबाव में चल रहा था। बुधवार की सुबह खुद पिता स्कूल गए थे, जहां उन्होंने बेटे की पढ़ाई और उसके हाल-चाल को लेकर आपस में बातचीत भी की थी।

डेढ़ साल पहले की एक घटना और सीसीटीवी फुटेज खंगालती पुलिस

पिता राजेश ने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पूर्व पिंटू ने घर पर रखे बक्से से धीरे-धीरे करके लगभग 70 हजार रुपये निकाल लिए थे। उस दौरान जब उसे डांटा गया और उसकी पिटाई की गई थी, तब उसने आवेश में आकर फांसी लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास भी किया था। हादसे के बाद मां मालती देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।

उधर, इस सनसनीखेज मामले की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आ गई और पूरे प्रकरण की गहनता से जांच शुरू कर दी। कक्षा के भीतर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और उसकी बारीकी से पड़ताल की जा रही है, ताकि मौत के असली कारणों की तह तक पहुंचा जा सके।

पूरी घटना का विवरण: क्लास में पानी की बोतल छूटने का बहाना बनाकर दोबारा घुसा था छात्र

फ्रेंड्स कॉलोनी के पचावली रोड स्थित इटावा पब्लिक स्कूल में बुधवार को दोपहर की छुट्टी के ठीक बाद आठवीं कक्षा के इस छात्र ने स्कूल की तीन मंजिला इमारत की खिड़की से नीचे छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस अप्रत्याशित घटना से पूरे स्कूल परिसर में अफरातफरी और कोहराम मच गया। फौरन सूचना मिलने पर पुलिस दल मौके पर पहुंचा और जांच-पड़ताल शुरू की। यह पूरी दुखद घटना कक्षा में लगे सीसीटीवी कैमरे में साफ-साफ कैद हो गई है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, मुखिया अड्डा न्यू कॉलोनी निवासी राजेश का 15 वर्षीय पुत्र पिंटू इटावा पब्लिक स्कूल में कक्षा आठ का छात्र था। बुधवार की दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे स्कूल की छुट्टी की घोषणा हो चुकी थी। छुट्टी होने के बाद पिंटू ने यह कहकर अपनी कक्षा में दोबारा प्रवेश किया कि उसकी पानी की बोतल क्लास में ही छूट गई है। इसके बाद वह अपनी सीट पर चढ़ा, खिड़की खोली और कुछ सेकंड तक शांत खड़े होकर नीचे देखता रहा, और फिर अचानक उसने तीसरी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी।

प्रधानाचार्य ने पहुंचाया अस्पताल, खिड़कियों पर सुरक्षा जंगले न होने पर उठे सवाल

यह खौफनाक मंजर देखते ही स्कूल का स्टाफ और अन्य कर्मचारी तुरंत दौड़कर मौके पर पहुंचे। स्कूल के प्रधानाचार्य विक्रम सिंह और एक अन्य शिक्षक घायल छात्र को अपनी बाइक पर लादकर तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ओमकांत ने उसका परीक्षण करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जैसे ही इस अनहोनी की खबर परिजनों तक पहुंची, वे बदहवास हालत में अस्पताल दौड़ पड़े, जहां उनका रो-रोकर कलेजा फट रहा था।

मृतक के पिता ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि विद्यालय की तीसरी मंजिल की सभी खिड़कियों पर मजबूत लोहे के जंगले (ग्रिल) लगे होने चाहिए थे। यदि स्कूल प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए होते, तो शायद इस तरह की अनहोनी को टाला जा सकता था।

वहीं दूसरी ओर, प्रधानाचार्य विक्रम सिंह ने पुलिस को बताया कि बुधवार की सुबह छात्र के पिता खुद स्कूल आए थे और उन्होंने बताया था कि मंगलवार की शाम वह पिंटू को गणित की ट्यूशन पढ़ाने के लिए लेकर गए थे, जहां ट्यूशन के दौरान वह मास्टर के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दे पाया था। इसी बात से नाराज होकर घर लौटने पर उसके पिता ने उसका मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया था और उसकी पिटाई भी की थी।

मामले की जांच कर रहे थाना प्रभारी अमित मिश्रा ने मीडिया को जानकारी दी कि शुरुआती जांच और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर यही स्पष्ट हुआ है कि छात्र ने पढ़ाई के तनाव और डांट के डर से कक्षा की खिड़की से कूदकर आत्महत्या की है। पुलिस तमाम साक्ष्यों को संकलित कर अग्रिम कानूनी कार्रवाई में जुटी है।