बिलासपुर रेंज में अपराधियों के खिलाफ बड़ा कदम, नई नीति से पुलिस रहेगी हर समय अलर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेंज में अब अपराध होने के बाद उस पर कार्रवाई करने की पुरानी परंपरा के स्थान पर अपराध की आशंका को जड़ से ही समाप्त करने (निवारक पुलिसिंग) पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसी महत्वपूर्ण उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पुलिस महानिरीक्षक (IG) राम गोपाल गर्ग के कुशल मार्गदर्शन में रेंज के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। इस बैठक में निवारक पुलिसिंग (Preventive Policing) को जमीन पर और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक नई कार्ययोजना और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के कड़े निर्देश जारी किए गए।
ऑनलाइन कार्यशाला में 200 से अधिक पुलिस अधिकारी व कर्मचारी रहे शामिल
आयोजित इस वर्चुअल कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी (SDOP), थाना प्रभारी और अन्य विभिन्न रैंक के लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े। इस बैठक का मुख्य एजेंडा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना, आदतन और शातिर अपराधियों पर पैनी निगरानी रखना तथा आधुनिक तरीकों से अपराधों पर नियंत्रण पाना था।
अपराधियों का होगा वैज्ञानिक वर्गीकरण, तैयार होगा सटीक डेटाबेस
इस नई और सख्त व्यवस्था के तहत क्षेत्र के सभी आदतन अपराधियों को उनकी आपराधिक गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वैज्ञानिक रूप से वर्गीकृत किया जाएगा। चोरी, नकबजनी और लूटपाट जैसी वारदातों में संलिप्त बदमाशों को विशेष निगरानी श्रेणी में रखा जाएगा, जबकि अवैध रंगदारी, मारपीट, भू-माफिया और अन्य संगठित अपराधों (Organized Crimes) से जुड़े तत्वों को एक अलग श्रेणी के तहत चिह्नित किया जाएगा। इन सभी असामाजिक तत्वों के ताजा फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खातों के विवरण और उनके अन्य आपराधिक रिकॉर्ड को अब नियमित अंतराल पर अपडेट किया जाएगा।
लागू किया जाएगा 'एक गुंडा-एक जवान' मॉडल, अपराधियों पर कसेगा शिकंजा
रेंज में कानून का राज स्थापित करने के लिए 'एक गुंडा-एक जवान' का अनूठा मॉडल लागू किया गया है, जिसके तहत प्रत्येक सक्रिय अपराधी की व्यक्तिगत निगरानी के लिए एक विशिष्ट पुलिसकर्मी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। अदालतों से जमानत पर छूटकर बाहर आने के बाद यदि कोई अपराधी दोबारा किसी गैरकानूनी गतिविधि में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत कठोर वैधानिक कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा जिला बदर (Externment), बाउंड ओवर और अन्य कानूनी प्रावधानों का भी मैदान पर प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाएगा।
मजबूत होगी निगरानी और रिकॉर्ड व्यवस्था, औचक कार्रवाई पर रहेगा जोर
पुलिस टीमों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्धों और अपराधियों की निगरानी करने का समय पूरी तरह गोपनीय और अनिश्चित रखा जाए, ताकि बदमाशों को पुलिस की गतिविधियों की भनक पहले से न लग सके। थानों में संधारित किए जाने वाले विभिन्न पुलिस रजिस्टरों और रिकॉर्ड प्रणालियों को भी पूरी तरह अपडेट, डिजिटल और सक्रिय रखने पर विशेष बल दिया गया है।
मानवाधिकारों का सम्मान और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का होगा पूर्ण पालन
पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने कार्यशाला के दौरान स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि अपराध नियंत्रण और अपराधियों की धरपकड़ के अभियान के दौरान माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के सभी दिशा-निर्देशों और मानवाधिकारों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी निर्दोष नागरिक, नाबालिग या किसी विशेष समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ बिना किसी ठोस और पर्याप्त आधार के कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
प्रमुख त्योहारों से पहले होगी सक्रिय अपराधियों की समीक्षा और परेड
पुलिस प्रशासन ने यह तय किया है कि देश के राष्ट्रीय पर्वों और किसी भी बड़े या प्रमुख त्योहार के आने से ठीक पहले सभी थानों में क्षेत्र के सक्रिय गुंडों, बदमाशों और निगरानी शुशुदा अपराधियों की समीक्षा बैठक व परेड आयोजित की जाएगी। इसके विपरीत, जो लोग लंबे समय से अपराध की दुनिया को पूरी तरह छोड़कर अब एक सामान्य और कानून-प्रिया नागरिक की तरह जीवन जी रहे हैं, उनके मामलों की कानूनी समीक्षा कर उन्हें निगरानी सूची (सश्योर्द लिस्ट) से बाहर हटाने की उचित प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।
जनभागीदारी और जनसहयोग से अपराध नियंत्रण पर दिया जा रहा विशेष बल
आईजी राम गोपाल गर्ग ने अपने संबोधन में अंत में कहा कि निवारक पुलिसिंग का यह मॉडल तभी शत-प्रतिशत सफल हो सकता है, जब पुलिस के साथ-साथ स्थानीय आम नागरिक, 'पुलिस मित्र' और कोटवार भी अपना सक्रिय और सकारात्मक सहयोग प्रदान करें। उन्होंने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया है कि वे इस नई SOP का अपने-अपने क्षेत्रों में कड़ाई से क्रियान्वयन कराएं और इसकी नियमित मॉनिटरिंग करते रहें।

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