बिहान योजना के तहत कोरिया मोदक लड्डू से महिलाओं और बच्चों को मिल रहा संपूर्ण पोषण
छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में पहली बार गर्भवती महिलाओं और बच्चों में पोषण सुधारने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष पौष्टिक ‘कोरिया मोदक’ लड्डू तैयार किए जा रहे हैं. यह लड्डू पूरी तरह से पारंपरिक मोटे अनाजों से बनाए जा रहे हैं. जिनमें सत्तू, रागी, बाजरा और ज्वार शामिल हैं. साथ ही, गोंद, सोंठ, तिल, मूंगफली, इलायची और घी का भी उपयोग किया गया है, जिससे लड्डू न केवल स्वादिष्ट बल्कि अत्यंत पौष्टिक भी बन गए हैं.
यह अनोखी पहल ‘कोरिया मोदक’ पायलट प्रोजेक्ट के तहत की जा रही है, जिसके अंतर्गत जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मिलकर यह लड्डू तैयार कर रही हैं. इस परियोजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को संतुलित और पोषक आहार उपलब्ध कराना है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों को संपूर्ण पोषण मिल सके.
बिहान योजना से जुड़ी महिलाओं की पहल
बिहान योजना के तहत गठित स्वयं सहायता समूह की 20 महिलाओं द्वारा ‘कोरिया मोदक’ लड्डू तैयार किए जा रहे हैं. रसिना, जो बैकुंठपुर की निवासी हैं. इस समूह की सक्रिय सदस्य हैं, वे बताती हैं कि ये लड्डू जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाते हैं. इससे गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को संपूर्ण पोषण मिल रहा है. रसिना ने लोकल 18 को आगे बताया कि हमने इस पहल की शुरुआत इसलिए की क्योंकि जिले में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को संतुलित आहार की आवश्यकता थी. यह लड्डू पूरी तरह से प्राकृतिक और पारंपरिक अनाजों से बने हैं. जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं और पोषण बढ़ाने में सहायक होते हैं.
रोजाना बन रहे 10-12 हजार लड्डू
महिला समूह की मेहनत और लगन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे प्रतिदिन 10 से 12 हजार लड्डू तैयार कर रही हैं. इनमें सबसे अधिक मांग रागी के लड्डू की है, क्योंकि यह हड्डियों को मजबूत करने और शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में सहायक होता है. कोरिया मोदक लड्डू को लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है. खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है. इस पहल के चलते जिले में कुपोषण और एनीमिया को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है.
महिलाओं को मिला विशेष प्रशिक्षण
महिलाओं को इस कार्य के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, जिससे वे गुणवत्तापूर्ण और स्वास्थ्यवर्धक लड्डू बना सकें. इस परियोजना से न केवल महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण मिला है, बल्कि जिले में कुपोषण कम करने में भी मदद मिल रही है. यह पहल महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मिसाल बन रही है, जिससे न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, बल्कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर में भी सुधार हो रहा है.

डिटॉक्स वाटर पीने से पहले जान लें इसके साइड इफेक्ट
पहलगाम बरसी से पहले गरजी इंडियन आर्मी, पाकिस्तान को सख्त संदेश
BRTS हटने के बाद भी नहीं सुधरी इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था, हाई कोर्ट नाराज
खुशी से मातम में बदली कहानी, भोज के बाद लौटते समय हुआ दर्दनाक हादसा
हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करता है कच्चा प्याज